प्रेरणादायक कहानी । inspirational stories

प्रेरणादायक कहानियाँ/motivational stories 

 प्रेरणादायक कहानियाँ - १ 

पहले सुपात्र बनो/प्रेरणादायक कहानियाँ/moral stories

तथागत बोले, सबसे पहले पात्रता विकसित करो,तभी तो आत्मज्ञान के योग्य बन पाओगे ।

प्रेरणादायक कहानी,inspirational stories
Buddha Story
एक धनिक सेठ भगवान बुद्ध के पास पहुंचा। उसने हाथ जोड़ कर भगवन बुद्ध से कहा की भगवन, मैं आत्मज्ञान के लिये प्रयास करता हूँ पर मेरा मन एकाग्र नहीं हो पाता है। भगवान बुद्ध ने कहा अभी तुम घर जाओ कल मैं तुम्हारे घर आ रहा हूँ वहीँ ज्ञान प्राप्ति का सरल साधन बताऊंगा। सेठ यह सुनते ही बहुत खुस हो गया और घर जाकर अपनी पत्नी को आदेश दिया कि भगवान बुद्ध के लिये खीर बनाओ, यह हमारा परम सौभाग्य है जो वह हमारे घर पधार रहे हैं। भगवान बुद्ध अगले दिन हाथ में कमंडल लिये सेठ के घर पहुंछे। सेठ के पुरे परिवार ने भगवान् बुद्ध का हार्दिक स्वागत किया, और कुछ देर बाद सेठ की पत्नी भगवन बुद्ध के लिये सोने की थाली में खीर परोस लायी। सेठ ने तथागत से खीर ग्रहण करने की प्राथना। तथागत ने अपना कमंडल सेठ के आगे बढाया और कहा, खीर इसमें डाल दो। सेठ ने देखा की कमंडल में गोबर भरा हुआ था। सेठ बोला, भगवन, गोबर भरे कमंडल में खीर डालने से तो खीर ख़राब हो जाएगी। भगवान बुद्ध यह सुनकर बोले वत्स तुम बिल्कुल ठीक कहते हो। सबसे पहले पात्रता विकसित करो तभी तो आत्मज्ञान के योग्य बन पाओगे। यदि मन मस्तिष्क में विकार और कुसंस्कार भरे हैं तो वे आत्मज्ञान को आत्मसात कैसे कर पाएंगे। सेठ ने उसी समय संकल्प ले लिया की वह शुद्ध आचरण से तथा ओपरोपकर  द्वारा पहले स्वयं को ऐसा सुपात्र बनाने का प्रयास करेगा कि उसे सहजता से उसे सहजता से आत्मज्ञान प्राप्त हो सके।motivational stories



the same inspirational story in English



Be the first character / inspirational stories

Tathagata said, first develop eligibility,Only then you will be able to become enlightened.

moral stories


A Dhanik Seth reached Lord Buddha. He folded his hands and said to Lord Buddha that God, I try for enlightenment, but my mind is unable to concentrate. Lord Buddha said that you go home now, tomorrow I am coming to your house, while I will tell you the simple means of acquiring knowledge. Seth was delighted on hearing this and went home and ordered his wife to make Kheer for Lord Buddha, it is our best fortune that he is visiting our house. Lord Buddha reached Seth's house the next day with a kamandalu in his hand. The entire family of Seth gave a warm welcome to Lord Buddha, and after some time he served kheer in a gold plate for Seth's wife, Bhagwan Buddha. Seth prayed to receive Kheer from Tathagata. Tathagata extended his kamandalu to Seth and said, "Put kheer in it." Seth saw that there was cow dung in the kamandalu. Seth said God, put kheer in cow dung filled kamandalu, then the kheer will be spoiled. Lord Buddha said after hearing this, you say exactly right. First of all, develop eligibility, then only you will be able to become enlightened. If the mind is filled with disorders and maladies in the brain, how will they be able to imbibe enlightenment? At the same time, Seth took a vow that he would try to make himself such a qualified person by pure conduct and by Oparopkar that he could easily attain self-realization.



moral stories


motivational stories/ प्रेरणादायक कहानियाँ - २


मोक्ष प्राप्ति का संकल्प/प्रेरणादायक कहानियाँ/moral stories

मोक्ष प्राप्ति का संकल्प,प्रेरणादायक कहानियाँ,moral stories
Resolve to attain salvation



मानव जीवन की सार्थकता अपना त्याग - तपस्यामय
 जीवन बिताने के साथ - साथ परोपकार व सेवा कार्यों में भी कुछ समय लगाने में है ।


एक संत अत्यंत विद्वान तथा त्यागी तपस्वी थे । सबेरे से शाम तक वह घोर तपस्या करते , भगवान की उपासना करते । दुनियादारी से उन्हें कुछ मतलब नहीं था । उनकी मृत्यु हुई , तो उन्हें चित्रगुप्त के सामने ले जाया गया । वह अपनी त्याग - तपस्या और भक्ति के वल पर मोक्ष चाहते थे , जबकि चित्रगुप्त उनके कुलीन कुल में जन्म लेने की व्यवस्था की थी । संत अड़ गए कि उन्हें जन्म नहीं , मोक्ष चाहिए । इस मामले को धर्मराज के सामने ले जाया गया । धर्मराज ने चित्रगुप्त द्वारा उनके विषय में प्रस्तुत विवरण पर निगाह डाली तथा बोले , महात्मन , यह बिल्कुल ठीक है कि आपने अपना व्यक्तिगत जीवन घोर तपस्यामय , निष्कलंक व्यतीत किया । सांसारिक आसक्ति आपको छू भी नहीं पाई । किंतु मानव जीवन की सार्थकता अपना त्याग तपस्यामय जीवन बिताने के साथ - साथ परोपकार व सेवा कार्यों में भी कुछ समय लगाने में है । आपने संसार के दुखी प्राणियों को सुखी बनाने के लिए एक क्षण भी नहीं लगाया । उन्हें सद्कार्यों के प्रति प्रेरित नहीं किया । इस कर्तव्यहीनता के कारण आप मोक्ष के अधिकारी नहीं हैं । संत समझ गए कि केवल अपने मोक्ष का प्रयास तो वास्तव में स्वार्थ ही कहा जाएगा । अगले जन्म में उन्होंने भक्ति के साथ - साथ सेवा व परोपकार कर मोक्ष प्राप्ति का संकल्प लिया।


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the same inspirational story in English



Resolve to attain salvation/inspirational story



The meaning of human life is its sacrifice - austerity  Along with living life, there is also some time for philanthropy and service.



The meaning of human life is to spend some time in philanthropy and service as well as self-sacrificing life. 


A saint was a great scholar and an ascetic.  From morning till evening he used to do severe penance, worshiping God.  Worldly he meant nothing.  When he died, he was taken before Chitragupta.  He wanted salvation on his sacrifice - penance and devotion, while Chitragupta arranged for his aristocratic clan to be born.  The saints insisted that they want salvation, not birth.  The matter was taken before Dharmaraja.  Dharmaraja looked at the details presented by Chitragupta about him and said, Mahatman, it is perfectly right that you have spent your personal life in severe austerity, Spent impeccable  Worldly attachments could not even touch you.  But the meaning of human life is to spend some time in the pursuit of austerity as well as philanthropy and service.  You did not take a moment to make the unhappy creatures of the world happy.  He was not motivated towards goodwill.  You are not entitled to salvation because of this ruthlessness.  The saints understood that only the pursuit of their salvation would actually be called selfishness.  In the next life, he pledged to attain salvation through devotion as well as service and philanthropy.