Interesting stories in Hindi | Motivational Story | जुनूनी बालक और संत

Interesting stories in Hindi | जुनूनी बालक और संत

Motivational Story


Interesting stories in Hindi | Motivational Story | जुनूनी बालक और संत
Interesting stories in Hindi | जुनूनी बालक और संत

जब एक बालक जिसकी उम्र लगभग 16 से 17 साल की होगी पढने में भी काफी अच्छा था परन्तु उसका पढने में बहुत अधिक मन नहीं लगता था मगर उसके सपने बहुत बड़े थे। और वह किसी भी हाल में अपने सपनो को पूरा करना चाहता था। शायद वह जानता था कि उसके सपने यूँ ही आसानी से पूरे तो नहीं होंगे किसी भी मनुष्य के नहीं होते हैं। हर व्यक्ति को अपने सपनो के लिये बहुत संघर्ष करना ही होता है। परन्तु उसके मन में कुछ और ही चलता था वह कहा करता था।
सब सोचेंगे थोड़ा, 
मैं थोड़ा ज्यादा सोच के दिखाऊंगा।
तुम सब बनाना अपनी दुनिया, 
मैं तो अपना ब्रह्माण्ड बनाउंगा।।
               
तो उस बालक के विचार कुछ इस प्रकार के होते थे अब आप सब अनुमान लगा सकते हैं कि उस बालक का जीवन लक्ष्य कैसा होगा? और उस बालक में कुछ कर गुजरने कि क्षमता है ये भी हम अनुमान लगा सकते हैं। उस बालक कि एक जीवन घटना का एक किस्सा ऐसा है जो हर व्यक्ति के कुछ सवालों का जवाब है।

तो चलिए शुरू करते हैं उस बालक को दुनिया को जानने का भी जज़्वा था। जिस कारण वह इधर-उधर छोटों से,बड़ो से,संतो से इत्यादि वह जीवन को जानना चाहता था और इस चकाचौंद की दुनिया के सारी सुख सुविधाओं से वंचित भी नहीं रहना चाहता था। इस कारण वह सन्यास तो नहीं ले सकता था। परन्तु ज्ञान उसे जहाँ मिलता वह वहां से ज्ञान ग्रहण कर लेता। घटना कुछ इस प्रकार है कि वह अपने असंभव सपनो को पूर्ण करने के लिये अपनी उस उम्र से ही पैसे कमाना शुरू कर देना चाहता था और वह ये कर भी सकता था वह बालक उस उम्र में भी काफी होनहार और जीवन यापन करने के लिये जीवन-ज्ञान प्राप्त कर चुका था। परन्तु उसके घर वाले उसे पैसे कमाने कि इजाजत नहीं दे रहे थेउसके घर वालों का कहना था कि पहले अपनी पढाई पूरी कर लो उसके बाद पैसे ही कमाने हैं। इस बात से वह बालक चिंतित और परेशान रहने लगा और इस प्रश्न के उत्तर की खोज करने लगा पैसे कमाने कि सही उम्र क्या है? उसने खुद भी काफी चिंतन मनन किया परन्तु उत्तर न खोज सका। वह अक्सर पास के मंदिर के संत के पास जाया करता था वह संत भी बहुत ज्ञानी थे और दूर दूर से लोग उनके पास अपने जीवन के प्रश्नों से परेशान होकर उत्तर की खोज में आया करते थे और वह बालक अक्सर उन संत के पास जाया करता था और बालक जीवानज्ञान की ओर अग्रसर रहता था। इसीलिए वह संत उस बालक को बहुत पसंद किया करते थे या यह कह सकते हैं कि संत को भी उस बालक से मोह था तो बालक संत के पास पहुंचा और बोला गुरुदेव Paise kamane ki sahi umar kya hai? इस प्रश्न का उत्तर मैं काफी समय से खोज रहा हूँ लेकिन सही उत्तर नहीं खोज पा रहा हूँ अब आप ही बताइए गुरु जी ने मुस्कुराते हुए उत्तर में प्रश्न पूंछते हुए कहा:- 

यदि पौधा न वृक्ष बना तो
कितने फल दे पायेगा?
यदि फल दे भी देगा तो, 
क्या वृद्धि कर पायेगा?
निश्चित ही वृद्धि रुक जाती है 
पौधे में फल के लग जाने से।
उत्तम फल, छाया और हवा 
एक 🌱 पौधा दे न सकता है
इसलिये पूर्व, ज्ञान एकत्र करो
तत्पश्चात व्यय करना।
और यदि कुछ ऐसा कर सकते हो
कि धन और ज्ञान दोनो मिले।
तो जाओ वत्स तुम वेल बनो
और अपने पत्र पवित्र करो।।

कहानी-अवसर को जाने मत देना | प्रेरक कहानी 

अर्थात यदि किसी पौधे में फल लग भी गए तो वह वृक्ष कि तुलना में ज्यादा लग पाएंगे क्या? और यदि पौधे में फल लग जायेंगे तो क्या वह वृक्ष बन सकता है? क्युकी पौधे में फल के लग जाने से निश्चित पौधे की वृद्धि  रुक जाती है और उत्तम रूप से यानी कि एक वृक्ष कि भांति फल, छाया और हवा ये तीनो तो इक पौधा नहीं दे सकता और यह कहते हुए गुरु जी ने कहा कि पैसे कमाने के लिये आपकी उम्र नहीं आपका ज्ञान महत्व रखता है अर्थात तुम्हे पहले अपने ज्ञान को पौधे से वृक्ष बनने देना होगा ततपश्चात तुम संसार के किसी भी कार्य को करने के लिये सज्ज हो सकते हो और फिर भी यदि तुम्हे ऐसा लगता कि तुम कुछ ऐसा कर सकते हो जिससे तुम्हारे ज्ञान में अवरोध उत्पन्न न होअर्थात ज्ञान की वृद्धि भी न रुके और धन भी अर्जित करने लगो तो वत्स जाओ तुम वेल के पौधे कि भांति वृद्धि करो और क्यूंकि वेल के पत्र भी पवित्र हैं और भगवन शिव को अर्पित किये जाते हैं और वेल के पौधा निरंतर वृद्धि भी करता है बालक को उसके प्रश्न का उत्तर मिल चुका था और बालक ने निरंतर अपने ज्ञान को बढ़ाना प्रारम्भ कर दिया और सदैव इस तरह के विचार बनाये जिससे उसके ज्ञान में और आमदनी (Income) दोनों में निरंतर वृद्धि हो।


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चाणक्य की कहानी | चाणक्य के जीवन की सर्वाधिक प्रसिद्ध कहानी जब सिकंदर ने सेल्यूकस को

चाणक्य की कहानी | चाणक्य के जीवन की सर्वाधिक प्रसिद्ध कहानी जब सिकंदर ने सेल्यूकस को


यह घटना उस समय की है , जब सिकन्दर की सेना भारत के आसपास कहीं ठहरी हुई थी। सिकन्दर ने अपने सेनापति सेल्यूकस को चाणक्य के पास मिलने के लिए भेजा। रात्रि का समय था , चाणक्य अपनी कुटिया में बैठे कुछ लिख रहे थे। सेवकों ने जब चाणक्य को सेल्यूकस के आने का समाचार कहा तो उन्होंने उसे अन्दर बुलवा लिया। 

सेल्यूकस के यह कहने पर कि वह व्यक्तिगत भेंट करने आए हैं तो चाणक्य ने लिखना बन्द कर सामने जल रहे दीपक को बुझा दिया और वहीं पास रखे दूसरे दीपक को जला लिया। सेल्यूकस ने अपने आने का कारण भी बताया। बीच - बीच में राजनीति पर भी चर्चा होती रही । चाणक्य कभी एक दीपक जलाते , दूसरे को बुझाते और कभी दूसरे को बुझाकर , पहले को जला देते और साथ - ही - साथ बात भी करते जाते थे।

सेल्यूकस चाणक्य को इस प्रकार करते देख भयभीत हो गया। उसे लगने लगा कि कहीं यह उस पर कोई जादू - टोना तो नहीं कर रहा? उसने घबराकर इस बार चाणक्य से पूछा तो चाणक्य उसका प्रश्न सुन खिलखिलाकर हंस पड़े और उन्होंने बताया कि- " यह कोई जादू - टोना नहीं है। एक दीपक में राज्य के पैसों से तेल भरा है और दीपक में मेरे व्यक्तिगत पैसे से तेल भरा गया है। जिस समय तुम मिलने आए , मैं राजकार्य कर रहा था। 


इसीलिए दीपक भी राज्य का ही जल रहा था। मैंने यह जानकर कि तुम्हारी भेंट ब्राह्मण चाणक्य से है , राज्य के महामंत्री से नहीं , राज्य का दीपक बुझाकर व्यक्तिगत दीपक जलाया। परन्तु , जब बीच - बीच में राज्य से सम्बन्धित चर्चा होने लगी। इसीलिए मैं इन दीपकों को बीच में जला - बुझा रहा था। क्योंकि जब राजकीय बातें होती हैं तो राज्य का व्यय , जब व्यक्तिगत बातें होती हैं तो व्यक्ति का व्यय , यही आदर्श राजनीति है। " यह सब सुनकर सेल्यूकस हतप्रभ सा रह गया। उसने चाणक्य के चरण - स्पर्श करते हुए कहा- " मेरा यहां आना सफल हुआ। मैं आज जान गया कि चन्द्रगुप्त और उसकी सेना की वास्तविक शक्ति किसमें निहित है। " ऐसे महान् थे , चाणक्य !  कहा जाता है कि चन्द्रगुप्त के जीवनकाल में ही इनकी इतिहास में चाणक्य का नाम अजर - अमर हो गया। चाणक्य भारत के महान् गौरव हैं और उनके इतिहास पर भारत को गर्व है। आप भी इस महापुरुष के कथन को पढ़कर जीवन की वास्तविकता के सम्बन्ध में देखें कि यह आपका कदम कदम पर मार्गदर्शन करता है या नहीं।

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अवसर को जाने मत देना | प्रेरक कहानी (Inspirational Story June 2020)

अवसर को जाने मत देना




यकीन मानो उसका जवाव उसके द्वारा किये गए कार्य से कहीं  गुना ज्यादा साहस भरा हुआ था उसने कहा:-


 "न तो हूँ मैं पढ़ा-लिखान देश और दुनिया जानू मैं!
फिर जो भी है कर्ता-धर्ता अवसर को ही मानू मैं!"


बात है 2017 की जब मैं अपनी मोटर-साइकिल उठा कर  अपनी नयी कहानी की तलाश में घर से निकल पड़ा। और अपने ननिहाल कि ओर मोटर-साइकिल मोड़ दी। 
अवसर को जाने मत देना | प्रेरक कहानी (Inspirational Story June 2020),inspirational story
मोटर-साइकिल उठा कर  अपनी नयी कहानी की तलाश में घर से निकल पड़ा। 


मैं गाँव के पास पहुंचा ही था कि वहीं रास्ते में खेत कि मुडेर पर बैठे हुए ननिहाल के परिचित लड़के(इकवाल) को देखा। तो मैं वहीँ रुक गया और बैठ के हम दोनों बातें करने लगे। वहीँ सामने सड़क निर्माड़ का कार्य चल रहा था हम दोनों पेड़ के नीचे ठंडी हवा में बैठे बैठे गप्पे लड़ाते और सामने चल रहे कार्य को देखते रहे।

अवसर को जाने मत देना | प्रेरक कहानी (Inspirational Story June 2020),inspirational story
मैं वहीँ रुक गया और बैठ के हम दोनों बातें करने लगे।


फिर हमने देखा कि वहां जो ट्रेक्टर ड्राइवर था, उसकी अपने मालिक से बहस हो गयी और वह तत्काल नौकरी छोड़कर वहाँ से चला गया हम दोनों दूर से बैठे इस द्रश्य को देख रहे थे। अब मालिक को चिंता हुई कि ड्राइवर तो चला गया अब ट्रेक्टर आखिर चलाएगा कौन? तभी उसी गाँव का एक व्यक्ति वहां पहुंचा और ट्रेक्टर मालिक से बोला कि वह बैठा है ड्राइवर (इकवाल) क्युँकी उस व्यक्ति ने इकवाल को कई वार ट्रेक्टर चलाते हुए देखा था। लेकिन मैं जानता था की इकवाल को ट्रेक्टर चलाना नहीं आता है वो तो बस किसी के साथ ऐसे ही ट्रेक्टर जरा आगे तक चला लेता था परन्तु उस व्यक्ति के उस ट्रेक्टर मालिक से यह कहते ही कि भाईसाहब ड्राइवर वह बैठा है। मालिक खुद चलकर हम दोनों की ओर आने लगा। और आकर इकवाल से बोला क्यों छोटे उस्ताद ट्रेक्टर चला लेते हो? इकवाल ने एक पल में सोच कर ही उत्तर दिया कि हाँ सेठ जी ! बिलकुल चला लेते हैं। सेठ ने कहा कि चलो जरा आगे तक चला के दिखाओ मैं अचंभित होकर इकवाल की ओर देखता रहा। कि इसने तो बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कह दिया कि ये ट्रेक्टर चला लेता है, परन्तु ये तो अभी तक ट्रेक्टर पर सही से बैठा भी नहीं है और मैं देखता रहा इकवाल अपना सीना ताने ट्रेक्टर की ओर चला गया और झट ट्रेक्टर पर चढ़ कर ट्रेक्टर स्टार्ट किया। और आगे तक ले गया मेरी आँखे फटी की फटी रह गयीं कि ये क्या लड़का है! 

अब तक जिसको किसी का साथ चाहिए होता था आज ये अकेले ही ट्रेक्टर चला के ले गया इकवाल आगे जाकर ट्रेक्टर बैक नहीं कर पा रहा था ये किसी और तो नहीं देखा सबने तो सिर्फ उसका ट्रेक्टर ले जाना देखा और मान लिया कि चला लेता है परन्तु मेरी तो आँखे इकवाल के साहस पर ही गढ़ी हुई थी तो मैंने ये देख लिया परन्तु इकवाल के चेहरे पर न तो मुझे चिंता दिखी न ही किसी प्रकार का डर दिखा। मैं बड़ा अचंभित था फिर इकवाल वापस मेरी ओर आया इस बार वो निकम्बा नाकारा खेत कि मुडेर पर बैठा हुआ इकवाल न था। इस बार वह नौकरी पाकर मेरी तरफ आता हुआ इकवाल था मैंने अब तक ऐसा साहस मात्र किस्से कहानियों में ही सुना था आज अपनी आँखों से देख कर ऐसा लग रहा था मानो किसी कहानी के किरदार को देख रहा हूँ। जब वह मेरे पास आया तो मैंने उससे कहा कि इकवाल भाई तुम तो ट्रेक्टर चलाना जानते भी नहीं हो फिर इतने साहस के साथ इतनी निडरता से स्वयं मालिक के सामने कैसे कह दिया कि तुम ट्रेक्टर चला लेते हो और अगर कहीं कोई गड़बड़ हो जाती तो? जब उसने मुझे जवाब दिया और यकीन मानो उसका जवाव उसके द्वारा किये गए कार्य से कहीं ज्यादा गुना साहस भरा हुआ था उसने कहा:-

देखो भाई
कि देखो भाई,
न तो हूँ मैं पढ़ा-लिखा ,न देश और दुनिया जानू मैं!
फिर जो भी है कर्ता-धर्ता अवसर को ही मानू मैं!
अब तक तो था मिला नहीं,अब मिला तो कैसे जाने देता?
और सेठ तो बोला ट्रेक्टर की ही,अवसर मिलता तो जहाज हवा का उड़ा देता।।

मैं उसका जवाब सुन कर और भी ज्यादा आश्चर्य में पड़ गया।और मात्र कुछ ही दिनों मैं वो निकम्बा नकारा लड़का जो कल तक गाँव मैं यहाँ वहां भटकता फिरता था। वह सम्पूर्ण गाँव के लिये उदहारण बन चुका था और  वैसे तो उसका घर बहुत अच्छा था जैसा कि हम अपनी बचपन की पेंटिग में बनाया करते थे एक झोपड़ी सामने तालाब दूसरी ओर पहाड़ बहुत ही मनमोहक द्रश्य था। उसके घर का लेकिन ये सब सिर्फ देखने या सुनने में ही अच्छा लगता है आज के समय में झोपड़ी में रहने वाले लोग गरीब ही होते हैं। तो इकवाल ने मात्र १ वर्ष में ही अपनी झोपड़ी को एक सुन्दर मकान में बदल दिया अगर इकवाल उस अवसर का त्याग कर देता किसी भी डर के कारण तो आज न तो वह अपने गाँव के लिये उदाहरण बन पाता और न ही आपके बीच यह  सच्ची कहानी उदहारण स्वरूप होती।

इकवाल का साहस वाकई तारीफ़ और उदाहरण के काबिल है और अंत में मैं यही कहूँगा कि अवसर को जाने मत देना आपका क्या विचार है ? comment कर अपनी राय दे।

                                                                                               Written By- Alok Pachori (Author)


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नम आँखों से कवियों ने कुछ यूँ दी सुशांत सिंह राजपूत को अंतिम विदाई (अलविदा सुशांत तुम बहुत याद आओगे)

सुशांत सिंह राजपूत को अंतिम विदाई

नम आँखों से कवियों ने कुछ यूँ दी सुशांत सिंह राजपूत को अंतिम विदाई (अलविदा सुशांत तुम बहुत याद आओगे),Sushant Singh Rajpoot
ALVIDA SUSHANT


सुशांत सिंह राजपूत का जन्म 19 जनवरी 1986 को बिहार के पटना में  हुआ था जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बहुत ही कम उम्र और कम समय में उन्होंने वह मुकाम और सोहरत हासिल की जो किसी भी अभिनेता को हासिल करने में सालों लग जाते हैं उनके यूँ दुनिया से हार जाने और आत्महत्या कर लेने से सम्पूर्ण देश स्तब्द है ऐसा लग रहा है मानो किसी फिल्म की सूटिंग चल रही हो यह एक अविश्वसनीय घटना है उनके मृत्यू से देश भर में शोक का माहौल है उन्हें नाम आँखों से अंतिम विदाई देते हुए डॉ कुमार विश्वास और अन्य लेखको ने कहा:- 


# तुम गए क्या शहर सूना कर गए
   दर्द का आकार दूना कर गए .. ! " #SushantSingh Rajput

# बात करो रूठे यारों से सन्नाटे से डर जाते हैं !
   इश्क़ अकेला जी सकता है ,
   दोस्त अकेले मर जाते हैं !!
ये लड़का सोने नहीं दे रहा.ऐसा भी क्या भाई ? ये तो ठीक नहीं किया तुमने  -Dr. Kumar Vishwas

#  रहने को तो दहर में आता नहीं कोई,
    तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई....

#  तुम ऐसे जाओगे न सोचा था ना जाना था,
    हर तरफ़ खबर थी फ़ैल चुकी फ़िर भी मन न माना था।।

#  एक शिकवा और शिकन तक नहीं ज़बान पर
    मर गया कम्बख़्त पर अदाकारी नहीं गयी ।

#  जिसने खुद अपनी मूवी से मुश्किल से fight करना सिखाया 
    वो खुद भी किसी परेशानी से गुजर रहा था ।

#  एक तन्हा सितारा तन्हाई में खो गया,
    चाँद से प्यारा आसमाँ में जा के सो गया।

#  बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई
    इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया।

#  देखो खबर फैली है आज ये ज़माने में, 
    वो एक सितारा आया था आसमाँ के खज़ाने में !

#  प्रिय सुशांत! जाने किन विचित्र द्वंदों में बह गए तुम।
    ऐसे कि ... बस चित्र और छंदों में रह गए तुम ।

#  शब्द नही है कहने को,
    विश्वास नही होता है।
    सुसाइड करके एक सितारा ,
    यूं कफन में सोता हैं ।

#  वो खुद की दी हुई तालीम भूल गया
    एक और सितारा आज आसमा को लौट गया

#  हँसते हँसते यू रोता नहीं कोई,
   ख्वाब अपने मिटाता नहीं कोई,
   हुआ होगा कुछ तो गहरा आपके साथ भी,
   वर्ना यु मौत को गले से लगता नहीं कोई .

#  कुछ दर्द ऐसे बिन कहे आते हैं,
    कि पेड़ हरे होते हैं और टूट जाते हैं ।

#  एक बस तुझको ही खोना बाकी था,
    इससे बुरा इस साल और क्या होना बाकी था ।

बहुत याद आओगे सुशांत...........
नम आँखों से कवियों ने कुछ यूँ दी सुशांत सिंह राजपूत को अंतिम विदाई (अलविदा सुशांत तुम बहुत याद आओगे)
Alvida Sushant

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5+ Best Shayri Status For What'sapp (June) 2020

5+ Best Shayri Status For What'sapp (June) 2020

# ये दिल तुमसे मिलने का मन किया करता है, 
   ये धड़कता था मेरे लिए, 
   अब तेरे लिए जिया करता है, 
   और अब पूछे कोई भी प्रशन इससे 
   ये उत्तर एक दिया करता है, 
   कि दुनिया तो फरेबी है, ये तेरे लिए जिया करता है... 

# अगर तुम अनमोल ना होते मेरे लिए 
   तो बात कीमत की हो चुकी होती, 
   मेरा राज होता तुम पर, 
   तुम मेरी  हो चुकी होती... 

# बर्दाश्त नहीं होती थी जिससे किसी की खामोशी, 
   गूंगे भी बोल जाया करते थे अक्सर जिसकी जिद के आंगे, 
   आज वो भी गजब का खामोस हुआ बैठा है मुहोब्बत मे, 
   बस एक लफ्ज "हँ " सुनने के वास्ते... 

# तुम्हारे इंतज़ार मे यें आँखे नम हो जाती है, 
   बात करने से तुमसे मानो दिल की कुछ मुश्किलें कम हो         जाती है, 
   घूर घूर कर देखता हूँ तेरे घर तक का रास्ता, 
   क्या घर पर कुछ और बोलकर आप भी कहीं और गुम हो       जाती है... 

# सुभनाल्लाह है उनका चेहरा, नजरे कयामत ढाती है, 
   अच्छां क्या कहा पता बता दें उनके घर का?
   क्या तुमने कभी गौर नहीं किया? 
   हमारी भटकती नज़रें सीधे उनके घर तक जाती है... 

Written By- Udit Upadhyay
Instagram- u1d1i1t1

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पूर्व तैयारी का लाभ | जीवन ज्ञान

पूर्व तैयारी का लाभ | जीवन ज्ञान,प्रेरक कहानी
मेहनती किसान

एक बहुत मेहनती किसान था। वह बहुत मेहनत करता था। और एक दिन वह अपनी मेहनत से काफ़ी अमीर हो गाया   फिर उसने और ज़मीन खरीदना शुरू कर दिया। और अपने आस-पास की सारी ज़मीन उसने खरीद ली लेकिन वक़्त पहिया चलता जाता है इसी के चलते किसान बहुत अमीर हो गया और अब उसके पास काफ़ी सारे खेत हुआ करते थे। और  फिर वह बूढ़ा हो चला और किसान बिल्कुल अकेला था तो अब किसान अपने सारे कार्यों को सम्भालने के लिये स्वयं को असमर्थ प्रतीत करने लगा। और करता भी क्यों न? आखिर अपना सारा जीवन किसानी को समर्पित कर चुका था और इतनी सोहरत हासिल करने के पश्चात शरीर अब उतना साथ नहीं दे पाता था। तो एक दिन उसने सोचा कि क्यों न किसी और को अपने काम की देखभाल के लिये रख लूँ? मैं सारे काम का निरिक्षण करता रहूंगा। फिर किसान ने एक दिन Interview  रख दिया आखिर इतना बड़ा ज़मीदार था ऐसे ही किसी को काम पर कैसे रख सकता था।
पूर्व तैयारी का लाभ | जीवन ज्ञान,प्रेरक कहानी,साक्षात्कार
साक्षात्कार(Interview)

आस-पास से कई सारे लड़के बुलाये गये। सबसे उस बुजुर्ग किसान ने सवाल पूंछे (खेती के बारे में क्या-क्या जानते हो?, कैसे देखभाल करोगे?)  सबने अपनी-अपनी समझ से जवाव दिये लेकिन किसी का भी जवाव उस बुजुर्ग  किसान को पसन्द नहीं आया। जब आखरी लड़के से जवाव मांगा गया तो उसने बड़ा अजीब सा जवाब दिया उस किसान को वो जवाव समझ नहीं आया। लेकिन उसने वह अटपटे से जवाब की वजह से ही उस लड़के को नौकरी पर रख लिया।
पूर्व तैयारी का लाभ | जीवन ज्ञान,नौकरी पर रख लिया
नौकरी पर रख लिया

कि देखे तो ये आखिर करेगा क्या?  और वह जवाब यह था कि:-

"मैं तब सो सकता हूं जब तेज़ हवा चल रही हो।"

जवाव तो बेहद अजीब था ही किसी को भी समझ नहीं आया। फिर एक दिन बहुत तेज़ आँधी चलने लगी, किसान को चिन्ता हुई कि न जाने उसने जानवरों को बान्धा होगा या नहीं फ़सल सही होगी य नहीं। तो किसान खुद ही खेत पर चला आया और उसने देखा कि वह लड़का तो आराम से सो रहा है। किसान को गुस्सा आया और किसान ने तेज़ आवाज़ देते हुए उस लड़के को जगाया और कहा- "तुम यहाँ आराम से सो रहे हो वहाँ खेत की देखभाल कौन करेगा?" लड़के ने ज़वाव दिया-"मालिक मैने तो आपसे पहले ही कहा था कि जब तेज़ हवा चलेगी तब मैं सो सकता हूं।" और यह कहते हुए उसने करवट बदला और दुबारा सो गया। किसान को बहुत गुस्सा आया लेकिन खेत तो आखिर किसान का था तो किसान खुद चल पड़ा खेत की ओर और वहाँ जाकर उसने देखा कि सब कुछ बहुत बढि़या ढंग से व्यवस्थित था। तब जाके किसान मुस्कुराया और उस दिन जाकर उसे उस लड़के का जवाव समझ आया, कि तैयारी पहले कर लेनी चाहिए और जब बिपत्ती आये तब निश्चिन्त हो जाना चाहिए।।

आप इस कहानी से क्या सीखे अगर कुछ नयी सीख आपके मन आयी हो तो comment के माध्यम से हमारे पाठकों से साझा अवश्य करें क्युँकी:- "एक व्यक्ती सब कुछ नहीं जानता मगर सब कुछ न कुछ जरूर जानते हैं।।"

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Koi Deewana Kehta Hai Full Lyrics/ कोई दीवाना कहता है/ डॉ कुमार विश्वास (सम्पूर्ण कविता) 2020

Koi Deewana Kehta Hai Full Lyrics/ कोई दीवाना कहता है/ डॉ कुमार विश्वास (सम्पूर्ण कविता) 2020

कोई दीवाना कहता है,koi deewana kehta hai full lyrics
Koi Deewana Kehta Hai 


Koi Deewana kehta hai full lyrics


कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है।
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है।।
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है।
ये तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है ।।

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है।
कभी कबिरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है।।
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आँखों में आँसू हैं।
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है।।

समंदर पीर का अंदर है, लेकिन रो नहीं सकता।
ये आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नहीं सकता है।।
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले।
जो मेरा हो नहीं पाया, वो तेरा हो नहीं सकता।।

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा,
हमारे दिल में कोई ख्वाव पल बैठा तो हंगामा।
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का,
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा।।

मैं उसका हूँ वो इस अहसास से इनकार करता है,
भरी महफ़िल में भी रुशवा मुझे हर बार करता है। 
यकीं है सारी दुनिया को खफा है हमसे वो लेकिन,
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है।।

मैं जब भी तेज़ चलता हूँ नज़ारे छूट जाते हैं,
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो सांचे टूट जाते हैं।
मैं रोता हूँ तो आके लोग कन्धा थप-थपाते हैं, 
मैं हँसता हूँ तो मुझसे लोग अक्सर रूठ जाते हैं।।

मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हे बतला रहा हूँ मैं,
कोई लब छू गया था तब जो अब तक गा रहा हूँ मैं।
बिछड़ के तुमसे अब कैसे जिया जाये बिना तड़पे,
जो मैं खुद ही नहीं समझा वही समझा रहा हूँ मैं।।

कोई पत्थर की मूरत है किसी पत्थर में मूरत है, 
लो हमने देख ली दुनिया जो इतनी खूबसूरत है।
ज़माना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर ये है ,
तुझे मेरी ज़रूरत है मुझे तेरी ज़रूरत है।।

बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया। 
अधूरा अनसुना ही रह गया वो प्यार का किस्सा, 
कभी तुम सुन्न नहीं पाए कभी मैं कह नहीं पाया।।

नज़र में सोखियाँ लब पर मोहब्बत का तराना है, 
मेरी उम्मीद की ज़द मैं अभी सारा ज़माना है। 
कई जीते हैं दिल के देश को मालूम है मुझको,
सिकन्दर हूँ मुझे एक रोज़ खली हाथ जाना है।।

कही पर जग लिये तुम बिन, कहीं पर सो लिये तुम बिन 
भरी महफ़िल में भी अक्सर, तन्हा हो लिये तुम बिन। 
ये पिछले चंद वर्षों की कमाई साथ है अपने,
कभी तो हस लिये तुम बिन कभी तो रो लिये तुम बिन।।

ये चादर सुख की मौला क्यों सदा छोटी बनाता है?
सिरा कोई भी थामू दूसरा खुद छूट जाता है।
तुम्हारे साथ था तो मैं ज़माने भर में रुशवा था,
मगर अब तुम नहीं हो तो ज़माना साथ गाता है।।

कोई कब तक महज़ सोचे, कोई कब तक महज़ गाये 
इलाही क्या ये मुमकिन है की कुछ ऐसा भी हो जाये। 
मेरा महताब उसकी रात के आघोष में पिघले,
मैं उसकी नींद मैं जागूं ,वो मुझमे घुल के सो जाये।।

तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ 
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ।
तुम्हे मैं भूल जाऊं ये मुमकिन तो है नहीं लेकिन 
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ।।


तुझको गुरूर-ऐ-हुस्न है, मुझको शुरूर-ऐ-फन है
दोनों को खुदपसन्दगी की लत बुरी भी है।
तुझमे छुपा के खुद को मैं रख भी दूं लेकिन,
मुझको कुछ रख के भूल जाने की आदत बुरी भी है।।

तुम्हारा ख्वाव जैसे गम को अपनाने से डरता है,
तुम्हारी आँख का आंसू ख़ुशी पाने से डरता है।
अजब है लज्जत-ऐ-गम भी,जो मेरा दिल अभी कल तक,
तेरे जाने से डरता था,वो अब आने से डरता है।।

हर इक पाने में, हर इक खोने में तेरी याद आती है,
नमक आँखों में घुल जाने में तेरी याद आती है।
तेरी अमृत भरी लहरों को क्या मालूम गंगा माँ?
समन्दर पार वीराने में उसकी याद आती है।।

हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते,
मगर रस्म-ऐ-वफ़ा ये है कि ये भी कह नहीं सकते।
ज़रा कुछ देर तुम उन साहिलों की चीख सुन भर लो,
जो लहरों में तो डूबे हैं, मगर संग बह नहीं सकते।।

कलम को खून में खुद के डुबाता हूँ तो हंगामा,
गिरेबाँ अपना आंसूं में भिगता हूँ तो हंगामा।
नहीं मुझ पर भी जो खुद की खबर, वो है ज़माने पर 
मैं हँसता हूँ तो हंगामा मैं रोता हूँ तो हंगामा।।

पनाहों में जो आया हो उस पर वार क्या करना?
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर अधिकार क्या करना?
मोहब्बत का मज़ा तो डूबने की कसमकस है,
जो हो मालूम गहरायी तो दरिया पार क्या करना?

वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है,
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है।
किसी से अपने दिल की बात तो कहना न भूले से,
यहाँ ख़त भी थोड़ी देर में अख़बार होता है।।

मेरे जीने में मरने में तुम्हारा नाम आएगा,
मैं सांसे रोक लूं फिर भी यही इलज़ाम आएगा।
हर इक धड़कन में जब तुम हो तो अपराध क्या मेरा?
अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आएगा।।

मैं उसका हूँ वो इस बात से इनकार करता है,
भरी महफ़िल में भी रुशवा मुझे हर बार करता है।
यकीं है सारी दुनिया को कफा है हमसे वो लेकिन,
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है।।

हमारे शेर सुन कर के भी जो खामोश इतना है,
खुदा जाने गुरूर-ऐ-हुस्न में मदहोश कितना है।
किसी प्याले से पूंछा है सुराही में सबब मै का,
जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये होश कितना है।।

ये उर्दू बज़्म है और मैं हिंदी माँ का जाया हूँ,
ज़ुबाने मुल्क की बहने हैं ये पैगाम लाया हूँ।
मुझे दुगनी मोहब्बत से सुनो उर्दू ज़बाँ बालों,
मैं अपनी माँ का बेटा हूँ, मैं घर मौसी के आया हूँ।।

ये दिल बर्बाद करके, इसमें क्यों आबाद रहते हो
कोई कल कह रहा था तुम अलाहाबाद रहते हो।
ये कैसी सोहारतें मुझको अताह कर दी मेरे मौला,
मैं सब कुछ भूल जाता हूँ मगर तुम याद रहते हो।।

सजी हैं खुशनुमा महफ़िल, सभी दिलदार बैठे हैं
जिधर देखो उधर ही इश्क के बीमार बैठे हैं।
हसीनों की अदाओं पर सभी दिल हार बैठें हैं,
हजारों मर मिटे और सैकड़ों तैयार बैठे हैं।।

न पाने कि खुशी है है कुछ, न खोने का ही कुछ गम है 
ये दौलत और सोहरत सिर्फ कुछ ज़ख्मों का मरहम है।
अजब सी कसमकस है रोज़ जीने, रोज़ मरने में  
मुक्कमल ज़िन्दगी तो है मगर पूरी से कुछ कम है।।

बदलने को तो इन आँखों ने मंजर कम नहीं बदले,
तुम्हारी याद के मौसम, हमारे गम नहीं बदले।
तुम अगले जन्म में हमसे मिलोगी तब तो मानोगी 
ज़माने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले।।

गिरेबाँ चाक करना क्या, सीना और मुश्किल है,
हर इक पल मुस्कुरा के अश्क पीना और मुश्किल है।
हमारी बदनसीबी ने हमें इतना सिखाया है,
किसी के इश्क में मरने से जीना और मुश्किल है।।

कोई खामोश है इतना बहाने भूल आया है,
किसी इक तर्रनुम में तराने भूल आया है।
मेरी अब राह न तकना कभी ऐ आसमां वालों! 
मैं इक चिड़िया की आखों में उड़ाने भूल आया हूँ।।

पुकारे आँख में चढ़ कर तो खूँ को खूँ समझाता है,
अँधेरा किसको कहते हैं ये तो बस जुगनू समझाता है।
हमें तो चाँद-तारों में भी तेरा रूप दिखता है,
मोहब्बत में नुमाइस को अदाएं तू समझता है।। 

स्वयं से दूर हो तुम भी, स्वयं से दूर हैं हम भी 
बहुत मशहूर हो तुम भी, बहुत मशहूर हैं हम भी
बड़े मगरूर हो तुम भी, बड़े मगरूर हैं हम भी 
अतः मजबूर हो तुम भी, अतः मजबूर है हम भी।।

जो मैं या तुम समझ ले वो इशारा कर लिया मैने
भरोसा बस तुम्हारा था तुम्हारा कर लिया मैने।
लहर है, हौसला है, रब है, हिम्मत है, दुआयें हैं
किनारा करने वालों से किनारा कर लिया मैने।।


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