Interesting stories in Hindi | Motivational Story | जुनूनी बालक और संत

Interesting stories in Hindi | जुनूनी बालक और संत

Motivational Story


Interesting stories in Hindi | Motivational Story | जुनूनी बालक और संत
Interesting stories in Hindi | जुनूनी बालक और संत

जब एक बालक जिसकी उम्र लगभग 16 से 17 साल की होगी पढने में भी काफी अच्छा था परन्तु उसका पढने में बहुत अधिक मन नहीं लगता था मगर उसके सपने बहुत बड़े थे। और वह किसी भी हाल में अपने सपनो को पूरा करना चाहता था। शायद वह जानता था कि उसके सपने यूँ ही आसानी से पूरे तो नहीं होंगे किसी भी मनुष्य के नहीं होते हैं। हर व्यक्ति को अपने सपनो के लिये बहुत संघर्ष करना ही होता है। परन्तु उसके मन में कुछ और ही चलता था वह कहा करता था।
सब सोचेंगे थोड़ा, 
मैं थोड़ा ज्यादा सोच के दिखाऊंगा।
तुम सब बनाना अपनी दुनिया, 
मैं तो अपना ब्रह्माण्ड बनाउंगा।।
               
तो उस बालक के विचार कुछ इस प्रकार के होते थे अब आप सब अनुमान लगा सकते हैं कि उस बालक का जीवन लक्ष्य कैसा होगा? और उस बालक में कुछ कर गुजरने कि क्षमता है ये भी हम अनुमान लगा सकते हैं। उस बालक कि एक जीवन घटना का एक किस्सा ऐसा है जो हर व्यक्ति के कुछ सवालों का जवाब है।

तो चलिए शुरू करते हैं उस बालक को दुनिया को जानने का भी जज़्वा था। जिस कारण वह इधर-उधर छोटों से,बड़ो से,संतो से इत्यादि वह जीवन को जानना चाहता था और इस चकाचौंद की दुनिया के सारी सुख सुविधाओं से वंचित भी नहीं रहना चाहता था। इस कारण वह सन्यास तो नहीं ले सकता था। परन्तु ज्ञान उसे जहाँ मिलता वह वहां से ज्ञान ग्रहण कर लेता। घटना कुछ इस प्रकार है कि वह अपने असंभव सपनो को पूर्ण करने के लिये अपनी उस उम्र से ही पैसे कमाना शुरू कर देना चाहता था और वह ये कर भी सकता था वह बालक उस उम्र में भी काफी होनहार और जीवन यापन करने के लिये जीवन-ज्ञान प्राप्त कर चुका था। परन्तु उसके घर वाले उसे पैसे कमाने कि इजाजत नहीं दे रहे थेउसके घर वालों का कहना था कि पहले अपनी पढाई पूरी कर लो उसके बाद पैसे ही कमाने हैं। इस बात से वह बालक चिंतित और परेशान रहने लगा और इस प्रश्न के उत्तर की खोज करने लगा पैसे कमाने कि सही उम्र क्या है? उसने खुद भी काफी चिंतन मनन किया परन्तु उत्तर न खोज सका। वह अक्सर पास के मंदिर के संत के पास जाया करता था वह संत भी बहुत ज्ञानी थे और दूर दूर से लोग उनके पास अपने जीवन के प्रश्नों से परेशान होकर उत्तर की खोज में आया करते थे और वह बालक अक्सर उन संत के पास जाया करता था और बालक जीवानज्ञान की ओर अग्रसर रहता था। इसीलिए वह संत उस बालक को बहुत पसंद किया करते थे या यह कह सकते हैं कि संत को भी उस बालक से मोह था तो बालक संत के पास पहुंचा और बोला गुरुदेव Paise kamane ki sahi umar kya hai? इस प्रश्न का उत्तर मैं काफी समय से खोज रहा हूँ लेकिन सही उत्तर नहीं खोज पा रहा हूँ अब आप ही बताइए गुरु जी ने मुस्कुराते हुए उत्तर में प्रश्न पूंछते हुए कहा:- 

यदि पौधा न वृक्ष बना तो
कितने फल दे पायेगा?
यदि फल दे भी देगा तो, 
क्या वृद्धि कर पायेगा?
निश्चित ही वृद्धि रुक जाती है 
पौधे में फल के लग जाने से।
उत्तम फल, छाया और हवा 
एक 🌱 पौधा दे न सकता है
इसलिये पूर्व, ज्ञान एकत्र करो
तत्पश्चात व्यय करना।
और यदि कुछ ऐसा कर सकते हो
कि धन और ज्ञान दोनो मिले।
तो जाओ वत्स तुम वेल बनो
और अपने पत्र पवित्र करो।।

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अर्थात यदि किसी पौधे में फल लग भी गए तो वह वृक्ष कि तुलना में ज्यादा लग पाएंगे क्या? और यदि पौधे में फल लग जायेंगे तो क्या वह वृक्ष बन सकता है? क्युकी पौधे में फल के लग जाने से निश्चित पौधे की वृद्धि  रुक जाती है और उत्तम रूप से यानी कि एक वृक्ष कि भांति फल, छाया और हवा ये तीनो तो इक पौधा नहीं दे सकता और यह कहते हुए गुरु जी ने कहा कि पैसे कमाने के लिये आपकी उम्र नहीं आपका ज्ञान महत्व रखता है अर्थात तुम्हे पहले अपने ज्ञान को पौधे से वृक्ष बनने देना होगा ततपश्चात तुम संसार के किसी भी कार्य को करने के लिये सज्ज हो सकते हो और फिर भी यदि तुम्हे ऐसा लगता कि तुम कुछ ऐसा कर सकते हो जिससे तुम्हारे ज्ञान में अवरोध उत्पन्न न होअर्थात ज्ञान की वृद्धि भी न रुके और धन भी अर्जित करने लगो तो वत्स जाओ तुम वेल के पौधे कि भांति वृद्धि करो और क्यूंकि वेल के पत्र भी पवित्र हैं और भगवन शिव को अर्पित किये जाते हैं और वेल के पौधा निरंतर वृद्धि भी करता है बालक को उसके प्रश्न का उत्तर मिल चुका था और बालक ने निरंतर अपने ज्ञान को बढ़ाना प्रारम्भ कर दिया और सदैव इस तरह के विचार बनाये जिससे उसके ज्ञान में और आमदनी (Income) दोनों में निरंतर वृद्धि हो।


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