अवसर को जाने मत देना | प्रेरक कहानी (Inspirational Story June 2020)

अवसर को जाने मत देना




यकीन मानो उसका जवाव उसके द्वारा किये गए कार्य से कहीं  गुना ज्यादा साहस भरा हुआ था उसने कहा:-


 "न तो हूँ मैं पढ़ा-लिखान देश और दुनिया जानू मैं!
फिर जो भी है कर्ता-धर्ता अवसर को ही मानू मैं!"


बात है 2017 की जब मैं अपनी मोटर-साइकिल उठा कर  अपनी नयी कहानी की तलाश में घर से निकल पड़ा। और अपने ननिहाल कि ओर मोटर-साइकिल मोड़ दी। 
अवसर को जाने मत देना | प्रेरक कहानी (Inspirational Story June 2020),inspirational story
मोटर-साइकिल उठा कर  अपनी नयी कहानी की तलाश में घर से निकल पड़ा। 


मैं गाँव के पास पहुंचा ही था कि वहीं रास्ते में खेत कि मुडेर पर बैठे हुए ननिहाल के परिचित लड़के(इकवाल) को देखा। तो मैं वहीँ रुक गया और बैठ के हम दोनों बातें करने लगे। वहीँ सामने सड़क निर्माड़ का कार्य चल रहा था हम दोनों पेड़ के नीचे ठंडी हवा में बैठे बैठे गप्पे लड़ाते और सामने चल रहे कार्य को देखते रहे।

अवसर को जाने मत देना | प्रेरक कहानी (Inspirational Story June 2020),inspirational story
मैं वहीँ रुक गया और बैठ के हम दोनों बातें करने लगे।


फिर हमने देखा कि वहां जो ट्रेक्टर ड्राइवर था, उसकी अपने मालिक से बहस हो गयी और वह तत्काल नौकरी छोड़कर वहाँ से चला गया हम दोनों दूर से बैठे इस द्रश्य को देख रहे थे। अब मालिक को चिंता हुई कि ड्राइवर तो चला गया अब ट्रेक्टर आखिर चलाएगा कौन? तभी उसी गाँव का एक व्यक्ति वहां पहुंचा और ट्रेक्टर मालिक से बोला कि वह बैठा है ड्राइवर (इकवाल) क्युँकी उस व्यक्ति ने इकवाल को कई वार ट्रेक्टर चलाते हुए देखा था। लेकिन मैं जानता था की इकवाल को ट्रेक्टर चलाना नहीं आता है वो तो बस किसी के साथ ऐसे ही ट्रेक्टर जरा आगे तक चला लेता था परन्तु उस व्यक्ति के उस ट्रेक्टर मालिक से यह कहते ही कि भाईसाहब ड्राइवर वह बैठा है। मालिक खुद चलकर हम दोनों की ओर आने लगा। और आकर इकवाल से बोला क्यों छोटे उस्ताद ट्रेक्टर चला लेते हो? इकवाल ने एक पल में सोच कर ही उत्तर दिया कि हाँ सेठ जी ! बिलकुल चला लेते हैं। सेठ ने कहा कि चलो जरा आगे तक चला के दिखाओ मैं अचंभित होकर इकवाल की ओर देखता रहा। कि इसने तो बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कह दिया कि ये ट्रेक्टर चला लेता है, परन्तु ये तो अभी तक ट्रेक्टर पर सही से बैठा भी नहीं है और मैं देखता रहा इकवाल अपना सीना ताने ट्रेक्टर की ओर चला गया और झट ट्रेक्टर पर चढ़ कर ट्रेक्टर स्टार्ट किया। और आगे तक ले गया मेरी आँखे फटी की फटी रह गयीं कि ये क्या लड़का है! 

अब तक जिसको किसी का साथ चाहिए होता था आज ये अकेले ही ट्रेक्टर चला के ले गया इकवाल आगे जाकर ट्रेक्टर बैक नहीं कर पा रहा था ये किसी और तो नहीं देखा सबने तो सिर्फ उसका ट्रेक्टर ले जाना देखा और मान लिया कि चला लेता है परन्तु मेरी तो आँखे इकवाल के साहस पर ही गढ़ी हुई थी तो मैंने ये देख लिया परन्तु इकवाल के चेहरे पर न तो मुझे चिंता दिखी न ही किसी प्रकार का डर दिखा। मैं बड़ा अचंभित था फिर इकवाल वापस मेरी ओर आया इस बार वो निकम्बा नाकारा खेत कि मुडेर पर बैठा हुआ इकवाल न था। इस बार वह नौकरी पाकर मेरी तरफ आता हुआ इकवाल था मैंने अब तक ऐसा साहस मात्र किस्से कहानियों में ही सुना था आज अपनी आँखों से देख कर ऐसा लग रहा था मानो किसी कहानी के किरदार को देख रहा हूँ। जब वह मेरे पास आया तो मैंने उससे कहा कि इकवाल भाई तुम तो ट्रेक्टर चलाना जानते भी नहीं हो फिर इतने साहस के साथ इतनी निडरता से स्वयं मालिक के सामने कैसे कह दिया कि तुम ट्रेक्टर चला लेते हो और अगर कहीं कोई गड़बड़ हो जाती तो? जब उसने मुझे जवाब दिया और यकीन मानो उसका जवाव उसके द्वारा किये गए कार्य से कहीं ज्यादा गुना साहस भरा हुआ था उसने कहा:-

देखो भाई
कि देखो भाई,
न तो हूँ मैं पढ़ा-लिखा ,न देश और दुनिया जानू मैं!
फिर जो भी है कर्ता-धर्ता अवसर को ही मानू मैं!
अब तक तो था मिला नहीं,अब मिला तो कैसे जाने देता?
और सेठ तो बोला ट्रेक्टर की ही,अवसर मिलता तो जहाज हवा का उड़ा देता।।

मैं उसका जवाब सुन कर और भी ज्यादा आश्चर्य में पड़ गया।और मात्र कुछ ही दिनों मैं वो निकम्बा नकारा लड़का जो कल तक गाँव मैं यहाँ वहां भटकता फिरता था। वह सम्पूर्ण गाँव के लिये उदहारण बन चुका था और  वैसे तो उसका घर बहुत अच्छा था जैसा कि हम अपनी बचपन की पेंटिग में बनाया करते थे एक झोपड़ी सामने तालाब दूसरी ओर पहाड़ बहुत ही मनमोहक द्रश्य था। उसके घर का लेकिन ये सब सिर्फ देखने या सुनने में ही अच्छा लगता है आज के समय में झोपड़ी में रहने वाले लोग गरीब ही होते हैं। तो इकवाल ने मात्र १ वर्ष में ही अपनी झोपड़ी को एक सुन्दर मकान में बदल दिया अगर इकवाल उस अवसर का त्याग कर देता किसी भी डर के कारण तो आज न तो वह अपने गाँव के लिये उदाहरण बन पाता और न ही आपके बीच यह  सच्ची कहानी उदहारण स्वरूप होती।

इकवाल का साहस वाकई तारीफ़ और उदाहरण के काबिल है और अंत में मैं यही कहूँगा कि अवसर को जाने मत देना आपका क्या विचार है ? comment कर अपनी राय दे।

                                                                                               Written By- Alok Pachori (Author)


5 Comments

Dont miss any opportunity because opportunity knocks at the door but once. Iqbaal is real inspiration.

Chances don't approach you,it's you who approach chances.

So plz guys don't miss your chance , carry on towards your goal.

Small opportunities are often the start of great ventures.so only Look for the opportunity. You can't wait to knock on the door for this... And it does not necessarily matter how many times in the opportunity life instead of your fate.

Yes my dear I want to run daily for get our goal with U...