Follow @jansevaexpress चाणक्य की कहानी | चाणक्य के जीवन की सर्वाधिक प्रसिद्ध कहानी जब सिकंदर ने सेल्यूकस को - जीवन ज्ञान (जीवन से जुड़े तथ्य)

चाणक्य की कहानी | चाणक्य के जीवन की सर्वाधिक प्रसिद्ध कहानी जब सिकंदर ने सेल्यूकस को

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चाणक्य की कहानी | चाणक्य के जीवन की सर्वाधिक प्रसिद्ध कहानी जब सिकंदर ने सेल्यूकस को


यह घटना उस समय की है , जब सिकन्दर की सेना भारत के आसपास कहीं ठहरी हुई थी। सिकन्दर ने अपने सेनापति सेल्यूकस को चाणक्य के पास मिलने के लिए भेजा। रात्रि का समय था , चाणक्य अपनी कुटिया में बैठे कुछ लिख रहे थे। सेवकों ने जब चाणक्य को सेल्यूकस के आने का समाचार कहा तो उन्होंने उसे अन्दर बुलवा लिया। 

सेल्यूकस के यह कहने पर कि वह व्यक्तिगत भेंट करने आए हैं तो चाणक्य ने लिखना बन्द कर सामने जल रहे दीपक को बुझा दिया और वहीं पास रखे दूसरे दीपक को जला लिया। सेल्यूकस ने अपने आने का कारण भी बताया। बीच - बीच में राजनीति पर भी चर्चा होती रही । चाणक्य कभी एक दीपक जलाते , दूसरे को बुझाते और कभी दूसरे को बुझाकर , पहले को जला देते और साथ - ही - साथ बात भी करते जाते थे।

सेल्यूकस चाणक्य को इस प्रकार करते देख भयभीत हो गया। उसे लगने लगा कि कहीं यह उस पर कोई जादू - टोना तो नहीं कर रहा? उसने घबराकर इस बार चाणक्य से पूछा तो चाणक्य उसका प्रश्न सुन खिलखिलाकर हंस पड़े और उन्होंने बताया कि- " यह कोई जादू - टोना नहीं है। एक दीपक में राज्य के पैसों से तेल भरा है और दीपक में मेरे व्यक्तिगत पैसे से तेल भरा गया है। जिस समय तुम मिलने आए , मैं राजकार्य कर रहा था। 


इसीलिए दीपक भी राज्य का ही जल रहा था। मैंने यह जानकर कि तुम्हारी भेंट ब्राह्मण चाणक्य से है , राज्य के महामंत्री से नहीं , राज्य का दीपक बुझाकर व्यक्तिगत दीपक जलाया। परन्तु , जब बीच - बीच में राज्य से सम्बन्धित चर्चा होने लगी। इसीलिए मैं इन दीपकों को बीच में जला - बुझा रहा था। क्योंकि जब राजकीय बातें होती हैं तो राज्य का व्यय , जब व्यक्तिगत बातें होती हैं तो व्यक्ति का व्यय , यही आदर्श राजनीति है। " यह सब सुनकर सेल्यूकस हतप्रभ सा रह गया। उसने चाणक्य के चरण - स्पर्श करते हुए कहा- " मेरा यहां आना सफल हुआ। मैं आज जान गया कि चन्द्रगुप्त और उसकी सेना की वास्तविक शक्ति किसमें निहित है। " ऐसे महान् थे , चाणक्य !  कहा जाता है कि चन्द्रगुप्त के जीवनकाल में ही इनकी इतिहास में चाणक्य का नाम अजर - अमर हो गया। चाणक्य भारत के महान् गौरव हैं और उनके इतिहास पर भारत को गर्व है। आप भी इस महापुरुष के कथन को पढ़कर जीवन की वास्तविकता के सम्बन्ध में देखें कि यह आपका कदम कदम पर मार्गदर्शन करता है या नहीं।

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