Koi Deewana Kehta Hai Full Lyrics/ कोई दीवाना कहता है/ डॉ कुमार विश्वास (सम्पूर्ण कविता) 2020

Koi Deewana Kehta Hai Full Lyrics/ कोई दीवाना कहता है/ डॉ कुमार विश्वास (सम्पूर्ण कविता) 2020

कोई दीवाना कहता है,koi deewana kehta hai full lyrics
Koi Deewana Kehta Hai 


Koi Deewana kehta hai full lyrics


कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है।
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है।।
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है।
ये तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है ।।

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है।
कभी कबिरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है।।
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आँखों में आँसू हैं।
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है।।

समंदर पीर का अंदर है, लेकिन रो नहीं सकता।
ये आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नहीं सकता है।।
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले।
जो मेरा हो नहीं पाया, वो तेरा हो नहीं सकता।।

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा,
हमारे दिल में कोई ख्वाव पल बैठा तो हंगामा।
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का,
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा।।

मैं उसका हूँ वो इस अहसास से इनकार करता है,
भरी महफ़िल में भी रुशवा मुझे हर बार करता है। 
यकीं है सारी दुनिया को खफा है हमसे वो लेकिन,
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है।।

मैं जब भी तेज़ चलता हूँ नज़ारे छूट जाते हैं,
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो सांचे टूट जाते हैं।
मैं रोता हूँ तो आके लोग कन्धा थप-थपाते हैं, 
मैं हँसता हूँ तो मुझसे लोग अक्सर रूठ जाते हैं।।

मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हे बतला रहा हूँ मैं,
कोई लब छू गया था तब जो अब तक गा रहा हूँ मैं।
बिछड़ के तुमसे अब कैसे जिया जाये बिना तड़पे,
जो मैं खुद ही नहीं समझा वही समझा रहा हूँ मैं।।

कोई पत्थर की मूरत है किसी पत्थर में मूरत है, 
लो हमने देख ली दुनिया जो इतनी खूबसूरत है।
ज़माना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर ये है ,
तुझे मेरी ज़रूरत है मुझे तेरी ज़रूरत है।।

बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया। 
अधूरा अनसुना ही रह गया वो प्यार का किस्सा, 
कभी तुम सुन्न नहीं पाए कभी मैं कह नहीं पाया।।

नज़र में सोखियाँ लब पर मोहब्बत का तराना है, 
मेरी उम्मीद की ज़द मैं अभी सारा ज़माना है। 
कई जीते हैं दिल के देश को मालूम है मुझको,
सिकन्दर हूँ मुझे एक रोज़ खली हाथ जाना है।।

कही पर जग लिये तुम बिन, कहीं पर सो लिये तुम बिन 
भरी महफ़िल में भी अक्सर, तन्हा हो लिये तुम बिन। 
ये पिछले चंद वर्षों की कमाई साथ है अपने,
कभी तो हस लिये तुम बिन कभी तो रो लिये तुम बिन।।

ये चादर सुख की मौला क्यों सदा छोटी बनाता है?
सिरा कोई भी थामू दूसरा खुद छूट जाता है।
तुम्हारे साथ था तो मैं ज़माने भर में रुशवा था,
मगर अब तुम नहीं हो तो ज़माना साथ गाता है।।

कोई कब तक महज़ सोचे, कोई कब तक महज़ गाये 
इलाही क्या ये मुमकिन है की कुछ ऐसा भी हो जाये। 
मेरा महताब उसकी रात के आघोष में पिघले,
मैं उसकी नींद मैं जागूं ,वो मुझमे घुल के सो जाये।।

तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ 
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ।
तुम्हे मैं भूल जाऊं ये मुमकिन तो है नहीं लेकिन 
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ।।


तुझको गुरूर-ऐ-हुस्न है, मुझको शुरूर-ऐ-फन है
दोनों को खुदपसन्दगी की लत बुरी भी है।
तुझमे छुपा के खुद को मैं रख भी दूं लेकिन,
मुझको कुछ रख के भूल जाने की आदत बुरी भी है।।

तुम्हारा ख्वाव जैसे गम को अपनाने से डरता है,
तुम्हारी आँख का आंसू ख़ुशी पाने से डरता है।
अजब है लज्जत-ऐ-गम भी,जो मेरा दिल अभी कल तक,
तेरे जाने से डरता था,वो अब आने से डरता है।।

हर इक पाने में, हर इक खोने में तेरी याद आती है,
नमक आँखों में घुल जाने में तेरी याद आती है।
तेरी अमृत भरी लहरों को क्या मालूम गंगा माँ?
समन्दर पार वीराने में उसकी याद आती है।।

हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते,
मगर रस्म-ऐ-वफ़ा ये है कि ये भी कह नहीं सकते।
ज़रा कुछ देर तुम उन साहिलों की चीख सुन भर लो,
जो लहरों में तो डूबे हैं, मगर संग बह नहीं सकते।।

कलम को खून में खुद के डुबाता हूँ तो हंगामा,
गिरेबाँ अपना आंसूं में भिगता हूँ तो हंगामा।
नहीं मुझ पर भी जो खुद की खबर, वो है ज़माने पर 
मैं हँसता हूँ तो हंगामा मैं रोता हूँ तो हंगामा।।

पनाहों में जो आया हो उस पर वार क्या करना?
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर अधिकार क्या करना?
मोहब्बत का मज़ा तो डूबने की कसमकस है,
जो हो मालूम गहरायी तो दरिया पार क्या करना?

वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है,
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है।
किसी से अपने दिल की बात तो कहना न भूले से,
यहाँ ख़त भी थोड़ी देर में अख़बार होता है।।

मेरे जीने में मरने में तुम्हारा नाम आएगा,
मैं सांसे रोक लूं फिर भी यही इलज़ाम आएगा।
हर इक धड़कन में जब तुम हो तो अपराध क्या मेरा?
अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आएगा।।

मैं उसका हूँ वो इस बात से इनकार करता है,
भरी महफ़िल में भी रुशवा मुझे हर बार करता है।
यकीं है सारी दुनिया को कफा है हमसे वो लेकिन,
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है।।

हमारे शेर सुन कर के भी जो खामोश इतना है,
खुदा जाने गुरूर-ऐ-हुस्न में मदहोश कितना है।
किसी प्याले से पूंछा है सुराही में सबब मै का,
जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये होश कितना है।।

ये उर्दू बज़्म है और मैं हिंदी माँ का जाया हूँ,
ज़ुबाने मुल्क की बहने हैं ये पैगाम लाया हूँ।
मुझे दुगनी मोहब्बत से सुनो उर्दू ज़बाँ बालों,
मैं अपनी माँ का बेटा हूँ, मैं घर मौसी के आया हूँ।।

ये दिल बर्बाद करके, इसमें क्यों आबाद रहते हो
कोई कल कह रहा था तुम अलाहाबाद रहते हो।
ये कैसी सोहारतें मुझको अताह कर दी मेरे मौला,
मैं सब कुछ भूल जाता हूँ मगर तुम याद रहते हो।।

सजी हैं खुशनुमा महफ़िल, सभी दिलदार बैठे हैं
जिधर देखो उधर ही इश्क के बीमार बैठे हैं।
हसीनों की अदाओं पर सभी दिल हार बैठें हैं,
हजारों मर मिटे और सैकड़ों तैयार बैठे हैं।।

न पाने कि खुशी है है कुछ, न खोने का ही कुछ गम है 
ये दौलत और सोहरत सिर्फ कुछ ज़ख्मों का मरहम है।
अजब सी कसमकस है रोज़ जीने, रोज़ मरने में  
मुक्कमल ज़िन्दगी तो है मगर पूरी से कुछ कम है।।

बदलने को तो इन आँखों ने मंजर कम नहीं बदले,
तुम्हारी याद के मौसम, हमारे गम नहीं बदले।
तुम अगले जन्म में हमसे मिलोगी तब तो मानोगी 
ज़माने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले।।

गिरेबाँ चाक करना क्या, सीना और मुश्किल है,
हर इक पल मुस्कुरा के अश्क पीना और मुश्किल है।
हमारी बदनसीबी ने हमें इतना सिखाया है,
किसी के इश्क में मरने से जीना और मुश्किल है।।

कोई खामोश है इतना बहाने भूल आया है,
किसी इक तर्रनुम में तराने भूल आया है।
मेरी अब राह न तकना कभी ऐ आसमां वालों! 
मैं इक चिड़िया की आखों में उड़ाने भूल आया हूँ।।

पुकारे आँख में चढ़ कर तो खूँ को खूँ समझाता है,
अँधेरा किसको कहते हैं ये तो बस जुगनू समझाता है।
हमें तो चाँद-तारों में भी तेरा रूप दिखता है,
मोहब्बत में नुमाइस को अदाएं तू समझता है।। 

स्वयं से दूर हो तुम भी, स्वयं से दूर हैं हम भी 
बहुत मशहूर हो तुम भी, बहुत मशहूर हैं हम भी
बड़े मगरूर हो तुम भी, बड़े मगरूर हैं हम भी 
अतः मजबूर हो तुम भी, अतः मजबूर है हम भी।।

जो मैं या तुम समझ ले वो इशारा कर लिया मैने
भरोसा बस तुम्हारा था तुम्हारा कर लिया मैने।
लहर है, हौसला है, रब है, हिम्मत है, दुआयें हैं
किनारा करने वालों से किनारा कर लिया मैने।।


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